तुलसी के फायदे और नुक्सान | Basil benefits and side-effects in hindi

कभी कभी किसी वर्ग को समझने के लिए हम उसके प्रतिनिधि से वाकिफ होते हैं, जैसे भारत को शाहरुख़ खान, हॉकी (hockey) को ध्यानचंद और फुटबॉल को रोनाल्डो के नाम से जाना जाता है कुछ उसी तरह तुलसी (Basil)को औषधियों का पर्याय कहा जा सकता है ।

जहाँ एक तरफ तुलसी की महत्ता धार्मिक कार्यों में प्रचलित है वहीँ औषधि के रूप में भी तुलसी ने अच्छा ख़ासा नाम कमाया हुआ है । इस दिव्य पौधे को निम्न तरीकों से उपयोग में लाया जा सकता है।

सर्दी खांसी में लाभ

ठंडी के दिनों में सर्दी,सरदर्द होना आम बात है । तीन चार ग्राम तुलसी की पत्तियों को पीसकर दही (Curd),शहद (Honey) या दूध (Milk) के साथ खाली पेट लेने पर सर्दी-खांसी कम होती है ।

जी मचलाना (Nausea)

विधि : 3-4 तुलसी की पत्तियों के रस को शहद के साथ मिलाकर चाटने से उल्टी (vomit) जैसे भाव आना बंद हो जाते है ।

निमोनिआ (Pneumonia)

विधि : 50ग्रा तुलसी ,25ग्रा अदरक(Ginger),15ग्रा कालीमिर्च(Black pepper) और 10ग्रा इलायची(cardamom) कूटकर तब तक उबालें जब तक ये मिश्रण 200ग्रा बच जाए। यह मिश्रण सभी आयु के लोगों के लिए असरदार है ।

अस्थमा (Asthma)

गुलबनफ्सा, मुलेठी व तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर उपयोग करने से श्वांस रोगों से मुक्ति मिलती है ।

रोग-प्रतिरोधक छमता बढ़ाने में

तुलसी बच्चों एवं बड़ों के लिए एक रामबाण औषधि है । इसे निम्न तरह से उपयोग कर बहुत से रोगों से बचा जा सकता है।

विधि : तुलसी के पत्तों का 15-20ग्रा रस निकाल के गाए के घी में धीमी आंच पर गरम करें, फिर इस लेप से शरीर की मालिश करें। आप ऊर्जावान महसूस करेंगे।

भूख बढ़ाने के लिए

अक्सर छोटे बच्चों को भूख न लगने जैसी समस्याएं होती है ।इस परेशानी से निजात पाने के लिए माएं कुछ इस तरह तुलसी का उपयोग कर सकती है ।

विधि: अदरक, काली मिर्च,तुलसी के पत्ते,मिर्च व नमक मिलाकर चटनी बना ले ।इसे खाने के साथ परोसें ।यह चटनी पेट में होने वाले इन्फेक्शन (Infection)से बचाती है ।

संतान सुख के लिए

तुलसी बांझपन जैसी समस्यायों का भी इलाज करने में संभव है ।

विधि: तुलसी के 200ग्रा बीज मिश्री और गाए के दूध के साथ मिलाकर सुबह-शाम लें ।

गला बैठ जाने पर

सर्दियों में गला बैठ जाए तो तुलसी की 2-4 पत्तियां, थोड़ी सी मिश्री व एकाध काली मिर्च के साथ चूसें। इस विधि से गले की खराश कम हो जाएगी ।

अतिरिक्त विधि : 2-3 लौंग,3-4 तुलसी,3-4 कालीमिर्च कुचल के पानी में सेंधा नमक के साथ मिलाकर पिएं… इससे गला खुल जाएगा और आवाज़ साफ़ होगी।

कान में दर्द एवं पस की समस्या

तुलसी के पत्तों का रस निकाल कर 4-4 बूँद करके कान में डालें। इस तरह से भी कान दर्द ठीक न हो या फिर कान का पस ख़तम ना हो तो 50ग्रा तिल के तेल मे 20-25ग्रा तुलसी की पत्ती को धीमी आंच पर पकाएं और इस तेल को कान में डालें ।

बुखार

शरीर तप रहा हो, सामान्य या मलेरिया जैसा बुखार हो तो तुलसी के पत्ते व मिश्री का काढ़ा बनाकर रोगी को दें। इससे बुखार के बाद की कमजोरी भी दूर होगी ।

शरीर के किसी भी भाग पे चोट लग जाए तो पानी में तुलसी की पत्तियों को उबाल कर इस पानी से घाव धो लें।

स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए

तुलसी की 4-5 पत्तियां शहद के साथ मिलाके लेने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। यह उपाए पढाई लिखाई करने वाले बच्चों के लिए लाभकारी है।

सर में जुएं (lices)

तुलसी के पत्तों का रस निकाल के इससे बाल धो लें। सर में जुओं की समस्या ख़तम हो जाएगी ।

दांतों में दर्द

पायरिआ से बचने के लिए तुलसी के पत्ते, काली मिर्च ,सेंधा नमक का पेस्ट बना के मसूड़ों की मालिश करें। इस पेस्ट को रुई की मदद से मसूड़ों पे लगा के भी रख सकते हैं।

तुलसी छोटे से छोटे या बढे से बढे रोगों में लाभकारी है, परन्तु कहा गया है ना “अति सर्वत्र वर्जयेत”… तुलसी का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है ।

तुलसी के नुक्सान

यूजिनाल (Eugenol) की मात्रा अधिक होना

तुलसी में यूजिनाल नामक तत्व होता है। इसकी मात्रा ज्यादा हो जाने से खांसी या फिर पेशाब में खून आने जैसी समस्या हो सकती है ।

हाइपोग्लाइसीमिया (HYPOGLYCEMIA)

तुलसी में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है । वो मरीज जो शुगर कम करने के लिए दवाई ले रहे है वो इसका उपयोग कम करें।

खून का पतला हो जाना

तुलसी के सेवन से खून पतला हो जाता है ।यदि आप खून पतला करने वाली दवाइयां ले रहे हैं तो तुलसी के सेवन से बचें। दोनों का एक साथ उपयोग करने से खून काफी ज्यादा पतला हो जाता है और ये परेशानी का सबब साबित हो सकता है ।

गर्भवती महिलाओं में रिएक्शन

तुलसी के अत्यधिक सेवन से गर्भाशय सिकुड़ जाता है ।इससे बच्चे को जन्म देते वक़्त मुश्किल का सामना हो सकता है ।

तुलसी कुछ दवाइयों के असर को ज्यादा या कम कर देती है ।इससे उम्मीद के विपरीत प्रभाव पढ़ सकता है ।